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देई की देउठी - उटैल

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इस स्थान पर ग्रामवासियों द्वारा देई की नाम पर एक गाय का पालन करते है। जिसको देवी का स्वरूप माना जाता है जिसके दुध को न ही बेचा जाता है और न किसी को दिया जाता था। लेकिन गाय का दुध को यहां इस स्थान पर चढ़ाया जाता है। यह पोराणिक हिन्दु आदि शक्ति का स्थान है। इस स्थान को साफ रखने में सहयोग दे इस स्थान की देख रेख उटैल के गांव वासी और उनके द्वारा चलाये गये सोसाईटी चौहान क्लब उटैल द्वारा किया जाता है । धन्यवाद चौहान क्लब उटैल उटैल, पोस्ट - ऑफ़िस थैना, खत - पंजगांव, कालसी देहरादून उत्तराखण्ड भारत। Location: https://maps.app.goo.gl/MQ9t42zPLReXxb6eA

काली माता मंदिर - उटैल

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काली माता मंदिर - उटैल

कयलु वीर देवठी - मंदिर उटैल

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यह एक हिंदू मंदिर है जो कि महासू महाराज के वीर कयलु वीर महाराज को समर्पित है, यह देवता इस स्थान के क्षेत्रीय रक्षक देवता है। मंदिर में स्त्री तथा मलिन मांस मदिरा लेकर जाना वर्जित है। कयलु वीर देवठी - मंदिर उटैल would love your feedback. Post a review to our profile. https://g.page/r/Cavi_b6DlSDOEBI/review Save by:  Chauhan Club Utail Society 

पांडव मंडाण

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"मंडाण" शब्द का अर्थ उत्तराखंड की जौनसारी क्षेत्र की एक प्राचीन और लोकप्रिय लोकनृत्य शैली है। पांडव मंडाण विशेष रूप से पांडवों और महाभारत की कथाओं से संबंधित है। इस नृत्य शैली में: 1. कथा: पांडवों के जीवन की प्रमुख घटनाओं और कहानियों को नृत्य और संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। 2. प्रदर्शन: यह नृत्य आमतौर पर गाँव के खुले मैदानों या चौकों में आयोजित किया जाता है, विशेषकर धार्मिक अनुष्ठानों के अवसर पर। 3. वाद्य यंत्र: ढोल-दमौ, रणसिंगा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का उपयोग किया जाता है, जिनकी धुनों पर देवी-देवताओं का आह्वान भी किया जाता है। 4. महत्व: यह उत्तराखंड की संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और पांडवों के प्रति लोगों की श्रद्धा और भक्ति को दर्शाता है। इसे "पांडव नृत्य" भी कहा जाता है।